ऐसे समय में जी रहे है जहाँ लोग 10 मिनट की मुलाकात में शादी फिक्स कर देते हैलेकिन 1-1 घंटे के पांच इंटरव्यू लेने के बाद भी नौकरी नहीं देते।——-इंसान को बोलना सीखने में दो साल लग जाते हैंलेकिन… क्या बोलना है, यह सीखने में पूरी ज़िन्दगी निकल जाती है..——-एक जैसी ही दिखती थी माचिस की वो तीलियाँ.“कुछ ने दिये जलाये”…”और कुछ ने घर.”.——-यादें भी कितनी अजीब होती हैं न जिन पल मे हमरोये थे उन्हे याद करके हमे हँसी आती और जिनपलों मे हम हँसे थे उन्हे याद करके हमे रोना आता है।…——-हुनर तो सब में होता है…फर्क बस इतना होता है…किसी का छिप जाता है…तो किसी का छप जाता है…!!——-“अकड़”.इस शब्द को ध्यान से देखो तोइसमें कोई ‘मात्रा’ नहीं है…..लेकिनये अलग अलग ‘मात्रा’ में हर इंसान में मौजूद है!
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