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Wednesday, 6 July 2016

Funny Story of Intelligent King in Hindi

Ntomy hindi stories-Funny Story of Intelligent King in Hindi

एक राजा स्वयं को दुनिया का सबसे बढ़ा बुद्धिमान राजा मानता था | वो जानना चाहता था की उसकी सोच सही है या गलत, क्या इस संसार में उससे भी अधिक बुद्धिमान कोई है या नहीं| यह सोचकर उसने अपने सभी दरबारियों और कर्मचारियों को इकठ्ठा किया और उनसे पूछने को कहा की उसके मन में क्या है| बहुतों ने दिमाग लड़ाया पर कोई भी उसे संतुष्ट न कर सका | तब राजा ने दीवान को आदेश दिया की वह एक महीने में दुनिया के सबसे बुद्धिमान आदमी को -ढूंढ कर लाए, जो उसके विचारों का अनुमान लगा सके |दीवान ने हर जगह तलाश कि, पर व्यर्थ महीना ख़त्म होने को थापर कोई नतीजा नहीं निकला | दीवान बिलकुल निराश हो गया, लेकिन उसकी इकलोती बेटी ने उसे यह कहकर चिंतामुक्त कर दिया की वह उस सही आदमी को ढूंढ देगी | दीवान ने कहा– ‘ठीक है, देखूं तुम क्या कर सकती हो |

’एक दिन दीवान की बेटी ने एक मंदबुद्धि गडरिये को पिता के सामने लाकर खड़ा कर दिया | यह गडरिया उनके यहाँ नौकर था | उसने पिता से कहा की वे इसे राजा के पास ले जाये | दीवान भौंचक्का रह गया, पर बेटी ने जोर देकर कहा की यह भौंदू गडरिया उनकी सारि परेशानिया दूर कर देगा | और कोई चारा न देखकर दीवान गडरिये को दरबार में ले गया |राजा दरबार में दीवान का इंतजार कर रहा था | दीवान ने गडरिये को राजा के सामने पेश किया | गडरिये ने आँखे उठाकर राजा की और देखा | राजा ने अपनी एक ऊँगली ऊपर उठाई | इसके जवाब में गडरिये ने दो ऊँगलियाँ ऊपर उठाई | इस पर राजा ने तीन ऊँगलियाँ ऊपर उठाई |
यह देखकर गडरिये ने सर हिलाया और वहां से भागने की चेष्ठा की | राजा जोर से हंसा | ऐसा बुद्धिमान आदमी लाने के लिए उसने दीवान की पीठ ठोंकी और उसे पुरुस्कारों से लाद दिया |दीवान चित्रवत देखता रह गया | यहगोरख धंधाउसके पल्ले नहीं पड़ा | उसने राजा से खुलासा करने का आग्रह किया |राजा ने कहा–”एक उंगली उठाकर मैंने उससे पुछा की क्या में सबसे बुद्धिमान हूँ | दो उंगलियां उठाकर उसने मुझे याद दिलाया की भगवान भी तो है, जो अधिक नहीं तो मेरे बराबरबुद्धिमान तो है ही | तब मैंने पूछा की क्या कोई तीसरा भी है | इस पर उसने सर हिलाकर साफ मना किया | ये व्यक्ति सच में बड़ा ज्ञानी है | में सोचता था की में अकेला ही शक्तिशाली हूँ | इसने मुझे भगवान के अस्तित्व की याद दिलाई पर तीसरे की सम्भावन को नहीं माना |’
दरबार बर्खास्त हुआ | सब अपने-अपने रास्ते लगे | रात को दीवान ने मूढ़ गडरिये से पुछा की उसने राजा के इशारों का क्या मतलब निकाला और उसने राजा को क्या जवाब दिया | गडरिये ने कहा — मालिक मेरे पास सिर्फ तीन भेंड़े है | जब आप मुझे महाराज के पास ले गए तो उन्होंने मुझे एक उंगली दिखाई | में समझा की वे मेरी एक भेड़ लेना चाहते है |वे इतने बड़ेराजा ठहरे ! सो मेने उन्हें दो भेंड़ देनी चाहीऔर दो उंगली उठा दी | इस पर उन्होंने तीन उँगलियाँ दिखाई, यानी वे मेरी तीनो भेड़ लेना चाहते है | मुझे लगा यह उनकी ज्यादती है | सो मेंने इंकार करके वहां से भाग जाना चाहा |’दीवान गडरिये की बात सुनकर मुस्कुरा दिया और बोला –‘तू निश्चिन्त रह तुझसे तेरी भेंड़े कोई नहीं लेगा

Sunday, 17 April 2016

A VERY CUTE LOVE STORY

Ek ladka  tha...Ek din us ladke ka wrøng number lag jata h.. call ladki uthati h...Ladki ....hellø aap kønLadka.... aap kønLadki.... Phøne apne kiya hain tø ap bataø..Ladka...sørry yaar shayad wrøng number lag gyaLadki.... Its ØK.Ladke kø us ladki ki aawaj ßahut achchi lagi or wø raat ßhar us ladki ke ßaare me shøchta rahta hain ...Next day..Wø ladka phir us ladki kø call laga deta hain ..Ladki .. Hellø jee køn..Ladka ...wø main kal jiska wrøng number lag gya tha ..Ladki...ohh to aaj ßhi wrøng number lag gya..Ladka.. Aßhi tø jaanßhuj ke kiya mujhe aapki aawaz ßahut sweet lagi...Ladki.. Oh thanks ßut me ajnabiyø se àaat nahi krti..Ladka... Par hum døst ßhi tø ßan sakte hain .Ladki.. Kuch der søch ker ...ok thik hain...Or dønø aß roz phøne pe ßaat karne lage...Dhekhte hi dhekte 6 mønth gujar gye..or ek din ahchanak..Ladka.. Ek ßaat ßølu.Ladki... Ha ßolo.Ladka.. I love u.Ladki... ßut apne tø muje dhekha tak nahi hain...Ladka.. tø kya hua or ye mere sawal ka jawab nahi hain..Ladki.. Kuch der søch ker. I love u tø...Ladka.... Mujhe milna hai kal..Ladki... Thik h or uskø park me Milne ßulati hai..Next day ... WO ladka us ladki ka wait kar raha høta hain...Ladki waha aati hai or ßahut dur se ldke kø dhek kar chali jati h... Or ladka pura din wait krta rahta hain..Usi din ladka raat kø ladki kø phone karta hain...Ladka... Tum aai kyø nahi...Ladki.. wø me wøLadka .. Ager tum1gante me ghar nahi aai tø m susside kar lunga...Ladki Gabra jati hai or ldke k pass chali jati h..Ldka.. Kya hua dar gyi thi kya...Ladki.. Ruko m kuch dhikana chahti huLadki apni gardan dhikati h Jø ki thoda bhut jali hui thi...Ldka to isliye gaßra rahi thi are pagli jab mene tumko I love u ßola tha tø tumhe dhekha thodi tha or m tumhare dil se pyar krta hu tumhari Sharir se nahi...Ladki .. Rote hue ladke se lipat gyi or 2 week ßaad dono ne shaadi kr le...Pyar dil se høta hain sharir se nahi ...Jo pyar sharir se hø wø pyar nahi.

साधू की झोपड़ी


किसी गाँव में दो साधू रहते थे. वे दिन भर भीख मांगते और मंदिर में पूजा करते थे। एक दिन गाँव में आंधी आ गयी और बहुत जोरों की बारिश होने लगी; दोनों साधू गाँवकी सीमा से लगी एक झोपडी में निवास करते थे, शाम को जब दोनों वापस पहुंचे तो देखा कि आंधी-तूफ़ान के कारण उनकी आधी झोपडी टूट गई है। यह देखकर पहला साधू क्रोधित हो उठता है और बुदबुदाने लगता है ,” भगवान तू मेरे साथ हमेशा ही गलत करता है… में दिन भर तेरा नाम लेता हूँ , मंदिर में तेरी पूजा करता हूँ फिर भी तूने मेरी झोपडी तोड़ दी… गाँव में चोर – लुटेरे झूठे लोगो के तो मकानों को कुछ नहीं हुआ , बिचारे हम साधुओं की झोपडी ही तूने तोड़ दी ये तेरा ही काम है …हम तेरा नाम जपते हैं पर तू हमसे प्रेम नहीं करता….”तभी दूसरा साधू आता है और झोपडी को देखकर खुश हो जाता है नाचने लगता है और कहता है भगवान् आज विश्वास हो गया तू हमसे कितना प्रेम करता है ये हमारी आधी झोपडी तूने ही बचाई होगी वर्ना इतनी तेज आंधी – तूफ़ान में तो पूरी झोपडी ही उड़ जाती ये तेरी ही कृपा है कि अभी भी हमारे पास सर ढंकने को जगह है…. निश्चित ही ये मेरी पूजा का फल है , कल से मैं तेरी और पूजा करूँगा , मेरा तुझपर विश्वास अब और भी बढ़ गया है… तेरी जय हो !मित्रों एक ही घटना को एक ही जैसे दो लोगों ने कितने अलग-अलग ढंग से देखा … हमारी सोच हमारा भविष्य तय करती है , हमारी दुनिया तभी बदलेगी जब हमारी सोच बदलेगी। यदि हमारी सोच पहले वाले साधू की तरह होगी तो हमें हर चीज में कमी ही नजर आएगी और अगर दूसरे साधू की तरह होगी तो हमे हर चीज में अच्छाई दिखेगी ….अतः हमें दूसरे साधू की तरह विकट से विकट परिस्थिति में भी अपनी सोच सकारात्मक बनाये रखनी चाहिए।

Sunday, 10 April 2016

ेंसोच का फ़र्क Change Your Attitude & Perspective

{Hindi}

एक शहर में एक धनी व्यक्ति रहता था, उसके पास बहुत पैसा था और उसे इस बात पर बहुत घमंड भी था| एक बार किसीकारण से उसकी आँखों में इंफेक्शन हो गया|आँखों में बुरी तरह जलन होती थी, वह डॉक्टर के पास गया लेकिन डॉक्टर उसकी इस बीमारी का इलाज नहीं कर पाया| सेठ के पास बहुत पैसा था उसने देश विदेश से बहुत सारे नीम- हकीम और डॉक्टर बुलाए| एक बड़े डॉक्टर ने बताया की आपकी आँखों में एलर्जी है| आपको कुछ दिन तक सिर्फ़ हरा रंग ही देखना होगा और कोई और रंग देखेंगे तो आपकी आँखों को परेशानी होगी|अब क्या था, सेठ ने बड़े बड़े पेंटरों को बुलाया और पूरे महल को हरे रंग से रंगने के लिए कहा| वह बोला- मुझे हरे रंग से अलावा कोई और रंग दिखाई नहीं देना चाहिए मैं जहाँ से भी गुजरूँ, हर जगह हरा रंग कर दो|इस काम में बहुत पैसा खर्च हो रहा था लेकिन फिर भी सेठ की नज़र किसी अलग रंग पर पड़ ही जाती थी क्यूंकी पूरे नगर को हरे रंग से रंगना को संभव ही नहीं था, सेठ दिन प्रतिदिन पेंट कराने के लिए पैसा खर्च करता जा रहा था|वहीं शहर के एक सज्जन पुरुष गुजर रहा था उसने चारों तरफ हरा रंग देखकर लोगों से कारण पूछा| सारी बात सुनकर वह सेठ के पास गया और बोला सेठ जी आपको इतना पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं है मेरे पास आपकी परेशानी का एक छोटा सा हल है.. आप हरा चश्मा क्यूँ नहीं खरीद लेते फिर सब कुछ हरा होजाएगा|सेठ की आँख खुली की खुली रह गयी उसके दिमाग़ में यह शानदार विचार आया ही नहीं वह बेकार में इतना पैसा खर्च किए जा रहा था|तो मित्रों, जीवन में हमारी सोच और देखने के नज़रिए पर भी बहुत सारी चीज़ें निर्भर करतीं हैं कई बार परेशानी का हल बहुत आसान होता है लेकिन हम परेशानी में फँसे रहते हैं| तो मित्रों इसे कहते हैं सोच का फ़र्क|

Power of Concentration एकाग्रता से सफलता

ें

बहुत पुरानी बात है, एक वन था जिसमें बहुतसारे मेंढक रहते थे| वहाँ एक बहुत बड़ा औरउँचा पेड़ था| एक बार वन के सभी मेंढको की सभा हुई और उन्होनें एक प्रतियोगिता रखी |जिसमें जो मेंढक सबसे जल्दी पेड़ पे चढ़ कर चोटी पर पहुँचेगा उसे वन का राजा चुना जाएगा |अगले दिन सारे वन के मेंढक एक जगह एकत्रित हुए और सभी बारी बारी पेड़ पर चड़ने की तैयारी करने लगे| पर पेड़ उतना बड़ा था कि सारे मेंढक उपर चड़ने से घबरा रहे थे |बारी बारी सभी मेढक उपर चढ़ने लगे लेकिन धीरे धीरे क्या देखते हैं कि सारे मेंढक थक कर चूर होने लगते हैं और कुछ तो थककर वापस नीचे आने लगते हैं | कुछ मेंढक नीचे आकर उपर वालों को आवाज़ लगाते हैं कि वापस आ जाओ क्यूंकी पेड़ की चोटी पर पहुँचना असंभव है |सारे मेंढक नीचे आजाते हैं लेकिन एक छोटा सा मेंढक लगातार उपर चढ़ता जा रहा था | सारे मेढक उसे भी नीचे उतर आने को बोलने लगे लेकिन वह लगता ऊपर चढ़ता गया और छोटी पर पहुँच गया | जब वह नीचे वापस आया तो सबने उससे सफलता का रहस्या पूछना चाहा| वह कुछ भी नहीं बोला भीड़ में से किसी ने बताया कि वह बहरा है |तो मित्रों, यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है जब हम कुछ अच्छा काम करने के लिए आगे बढ़ते हैं तो बहुत सारे लोग हमें पीछे खींचते हैं | हममें से बहुत सारे धैर्य छोड़ देते हैं लेकिन जो बिना रुके एकाग्रता से आगे बढ़ता है वो अंत में सफल हो जाते हैं| एकाग्रता, समर्पण और आत्मानुशासन के बिना या तो आप असफल हो जायेंगे, या अपने क्षमता से कहीं कम सफलता पा सकेंगे |

ेंभगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं God Help Those who Help themselves



एक बार की बात है कि किसी दूर गाँव में एक किसान रहता था। उन दिनों बारिश का समय था चारों तरफ गड्ढों में पानी भरा हुआ था। कच्ची सड़क बारिश की वजह से फिसलन भरी हो गयी थी। सुबह सुबह किसान को बैलगाड़ी लेकर कुछ धन कमाने(to earn money) बाजार जाना होता था लेकिन आज बारिश की वजह से बहुत दिक्कत हो रही थी। फिर भी किसान धीरे धीरे सावधानी पूर्वक बैलगाड़ी लेकर बाजार(Market) की ओर जा रहा था।अचानक रास्ते में एक गड्ढा आया और बैलगाड़ी का पहिया गड्ढे में फंस गया। कीचड़ भरे गड्ढे से निकलना काफी मुश्किल था। बैल ने भी अपनी पूरी ताकत लगायी लेकिन सफलता नहीं मिली। अब तो किसान बुरी तरह परेशान हो उठा। उसने चारों तरफ नजर घुमाई लेकिन ख़राब मौसम में दूर दूर तक कोई नजर नहीं आया। किसान सोचने लगा कि किससे मदद माँगे कोई इंसान दिखाई ही नहीं दे रहा। किसान दुखी होकर एक तरफ बैठ गया और मन ही मन अपने भाग्य को कोसने लगा। हे भगवान! ये तूने मेरे साथ क्या किया? कोई आदमी भी दिखाई नहीं दे रहा इतना खराब नसीब मुझे क्यों दिया? किसान खुद के भाग्य को कोसे जा रहा था।तभी वहाँ से एक सन्यासी गुजरे उन्होंने किसान को देखा तो किसान सन्यासी के पास जाकर अपनी परेशानी बताने लगा। मैं सुबह से यहाँ बैठा हूँ, मेरी गाड़ी फँस गयी है और मेरा नसीबभी इतना ख़राब है कि कोई मेरी मदद करने भी नहीं आया। भगवान ने मेरे साथ बहुत अन्याय किया है। सन्यासी उसकी सारी बात सुनकर बोले- तुम इतनी देर से यहाँ बैठे अपने भाग्य को कोस रहे हो और भगवान(God) को बुरा भला बोल रहे हो, क्या तुमनेखुद अपनी गाड़ी निकालने का प्रयास किया?किसान- नहीं,सन्यासी- तो फिर किस हक़ से तुम भगवान(Lord) को दोष दे रहे हो, भगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं।अब किसान के बात समझ में आ गयी उसने तुरंत पहिया निकालने का प्रयास किया और वो सफल भी हुआ।तो मित्रों हममें से ज्यादातर लोग उस किसान की ही तरह हैंजो खुद कुछ नहीं करना चाहते और हमेशा अपने भाग्य और दूसरेलोगों को कोसते रहते हैं। हमें लगता है कि भगवान ने हमारेसाथ बहुत गलत किया है। हममें से कोई डॉक्टर(Doctor) बननाचाहता है, कोई इंजिनियर(Engineer), कोई कलेक्टर, कोई Businessman लेकिन जब हम अपने काम में सफल नहीं होते तो यही विचार हमारे दिमाग में आता है कि हमारा भाग्य ख़राबहै और भगवान ने कुछ नहीं दिया। लेकिन शायद आप भूल रहे हैं कि भगवान ने आपको, हम सबको एक बहुत अमूल्य चीज़ दी है- ये शरीर। आपके अंदर हर सामर्थ्य है तो फिर आप भाग्य भरोसे क्यों हैं? भगवान भी उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो खुदकी मदद करते हैं। किसी महान पुरुष का एक दोहा है –विद्या धन उद्धम बिना, कहूँ जो पावे कौन ,बिना डुलाये ना मिले, ज्यूँ पंखा की पौनमतलब बिना कार्य किये आप कुछ नहीं पा सकते। जैसे आपके सामने पंखा रखा हो लेकिन वो जब तक आपको हवा नहीं देगा जब तक उसे अपने हाथ से झलेंगे नहीं।तो मित्रों इस लेख का सार यही है कि आप खुद की मदद करिये तभी भगवान भी आपकी मदद करेंगे तो आओ आज मिलकर एक साथ शपथ लेते हैं कि कभी अपने भाग्य को नहीं कोसेंगे और स्वयं ही अपने कर्णधार बनेंगे।आपके विचार हमारे लिए अमूल्य हैं कृपया कमेंट नीचे जरूर करें धन्यवाद !!

सफलता का द्वार- आत्मविश्वास

एक बार एक बिज़नेसमैन जो कल तक एक सफल उद्धोगपति था अचानककिसी परेशानी से उसका बिज़नेस डूब गया और उस पर बैंक का कर्ज़ा भी हो गया और अब उसके पास कोई चारा नहीं बचा था| बैंक और सारे लेनदार उसे लगातार पैसे की भरपाई के लिए बोलरहे थे| अब तो उसे अपनी जिंदगी अंधेरे में नज़र आ रही थी| एक बार सुबह पार्क में घूमते हुए उसे एक बूढ़ा व्यक्ति दिखाई दिया| वो बूढ़ा उसके पास आया और उसे परेशान देखकर उससे परेशानी का कारण पूछा |बिज़नेसमैन ने सारी परेशानी व्रद्ध को बताई, बूढ़े व्यक्ति ने अपनी जेब से अपनी चेकबुक निकाली और एक चेक साइन कर के उसको दिया और कहा कि इससे तुम अपना बिज़नेस फिर से शुरू कर सकते हो और एक साल बाद मुझे ठीक इसी जगह इसी समय मिलना और मुझे मेरे पैसे वापस कर देना | यह कहते हुए बूढ़ा वहाँ से दूर चला गया| बिज़नेसमैन ने जब अपने हाथ में रखे चेक पर नज़र डाली तो वह हैरान रह गया क्यूंकी वो बूढ़ा कोई मामूली व्यक्ति नहीं था उस चेक पर सर वारेन बफ़ेट(एक मशहूर अमेरिकन उद्धयोगपति) के साइन थे और चेक की रकम थी $500,000| उसको खुद पर यकीन नहीं हुआ कि खुद वारेन बफ़ेट ने आकर मेरी परेशानी हल की है | फिर उसने सोचाकी ये रकम बैंक और लेनदारों को देने की बजाए वो पहले अपने बिज़नेस को बचाने के लिए संघर्ष करेगा और इमरजेंसी में ही उस चेक का प्रयोग करेगा |अब तो बिना किसी डर के वह फिर से अपना बिज़नेस बचाने में जुट गया क्यूंकी उसे पता था कि अगर कोई परेशानी होगी तो मैं चेक की मदद से बच सकता हूँ | बस फिर क्या था उसने जी तोड़ मेहनत की और एक बार फिर से अपने बिज़नेस को वापस खड़ा कर दिया | आज उस बात को एक साल पूरा हो चुका था और वह चेक भी आज तक ऐसे ही सही सलामत था |अपना वादा पूरा करने के लिए बिज़नेसमैन जब पार्क में गया तो उसे वहाँ वही बूढ़ा व्यक्ति दिखाई दिया| जैसे ही वह उसके पास आया अचानक एक नर्स पीछे से आई और व्रद्ध को पकड़ के ले गयी और कहा कि वह एक पागलख़ाने से भागा हुआ पागल है जो खुद को हमेशा वारेन बफ़ेट बताता है, यह कहकर नर्स व्रद्ध को ले गयी|अब वह आदमी एक दम आश्चर्य में था क्यूकी वह बूढ़ा ना तो बफ़ेट था और ना ही वह चेक असली था, जिस पर उसे इतना विश्वास था | उसकी आँखों में आँसू छलक आए क्यूकी उसने आज एक नकली रकम की वजह से जागे अपने आत्मविश्वास से आज सफलताप्राप्त कर ली थी जबकि वह पैसा कुछ था ही नहीं |तो मित्रों, दुनियाँ मे कुछ भी असंभव नहीं है बस अपना आत्मविश्वश जगाने की ज़रूरत है और एक बार जब आप आत्मविश्वास से भरपूर हो जाएँगे तो दुनियाँ की कोई बंदिशआपको नहीं रोक सकती |

ेंगिद्ध की उड़ान

ेंगिद्ध की उड़ान

एक घने जंगल में गिद्धों का एक झुण्ड रहता था। गिद्ध झुण्ड बनाकर लम्बी उड़ान भरते और शिकार की तलाश किया करते थे। एक बार गिद्धों का झुण्ड उड़ते उड़ते एक ऐसे टापू पर पहुँच गया जहां पर बहुत ज्यादा मछली और मेंढक खाने को थे।इस टापू पर गिद्धों को रहने के लिए सारी सुविधाएँ मौजूद थीं। अब तो सारे गिद्ध बड़े खुश हुए, मजे से वो उसी टापू पर रहने लगे, अब ना ही रोज शिकार की तलाश में जाना पड़ता और ना ही कुछ मेहनत करनी पड़ती। दिन रात गिद्ध बिना कोई काम कियेमौज करते और आलस्य में पड़े रहते थे।उस झुण्ड में एक बूढ़ा गिद्ध भी था, बूढ़े गिद्ध को अपने साथियों की ऐसी दशा देखकर बहुत चिंता हुई। वो गिद्धोंको चेतावनी देते हुए बोला – मित्रों हम गिद्धों को ऊँची उड़ान और अचूक निशाने और उत्तम शिकारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन इस टापू पर आकर सभी गिद्धों को आराम की आदत हो गई है और कुछ तो कई दिन से उड़े ही नहीं हैं। ये चीज़ें हमारी क्षमता और हमारे भविष्य के लिए घातक हो सकती हैं। इसलिए हम आज ही अपने पुराने जंगलों में वापस जायेंगे।अब बाकि सारे गिद्ध उस बूढ़े गिद्ध की हंसी उड़ाने लगे कि ये बूढ़े हो चुके हैं इनका दिमाग सही से काम नहीं कर रहा है, यहाँ हम कितनी मौज मस्ती से रह रहे हैं वापस वहां जंगलमें क्यों जाएँ ? ये कहकर सभी गिद्धों ने जाने से मना कर दिया। लेकिन बूढ़ा गिद्ध वापस चला गया।कुछ दिन बाद जंगल में रहते रहते एक दिन बूढ़े गिद्ध ने सोचा कि मेरा जीवन अब बहुत थोड़ा ही बचा है तो क्यों ना अपने सगे लोगों से मिल लिया जाये। यही सोचकर गिद्ध ने ऊँची उड़ान भरी और टापू पर पहुँच गया। वहाँ जाकर उसने जो द्रश्य देखा वो सचमुच भयावह था। पूरे टापू पर एक भी गिद्धजिन्दा नहीं बचा था, चारों तरफ गिद्धों की लाश ही पड़ी थी।अचानक एक घायल गिद्ध पर नजर पड़ी उसने बताया कि यहाँ कुछ दिन पहले चीतों का एक झुण्ड आया। जब चीतों ने हम पर हमला किया तो हम लोगों ने उड़ना चाहा लेकिन हम ऊँचा उड़ ही नहीं पाए और ना ही हमारे पंजों में इतनी ताकत थी कि हम उनका मुकाबला कर पाते। चीतों ने एक एक कर सारे गिद्धों को खत्मकर दिया। बूढ़ा गिद्ध दुखी होता हुआ वापस जंगल की ओर उड़ चला।दोस्तों हमारे जीवन में भी कुछ ऐसा ही होता है, हम अगर अपनी शक्तियों का लगातार प्रयोग नहीं करेंगे तो हम कमजोरपड़ते जायेंगे और एक दिन हमारी शक्तियां हमारे काम की ही नहीं रहेंगी। अगर आप अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते तो आपके दिमाग की क्षमता घटने लगेगी। आप अपने शरीर का उपयोग नहीं करेंगे तो आपकी ताकत घटने लगेगी। धीरे धीरे आपकी शक्तियां ही आपकी कमजोरियां बनती चली जाएँगी। अपने स्किल और क्षमताओं को जंग मत लगने दीजिये, लगातार खुद को तराशिये, खुद को update करते रहिये। तभी आप जिंदगी की इस जंग को शान से जीत पाएंगे। यूँ टाइमपास करने को तो जानवर भी जीते हैं लेकिन आप इंसान हैं, अपनी काबिलियत, अपनी ताकत को जिंदा रखिये, अपने कौशल, अपने हुनर को और तराशिये,उसपे धूल मत जमने दीजिये, और जब आप ऐसा करेंगे तो बड़ी से बड़ी मुसीबत आने पर भी आप ऊँची उड़ान भर पायेंगे!मित्रों इस कहानी से आपने क्या सीखा और कैसे इस कहानी को अपने जीवन पर इस्तेमाल करेंगे ? हमें कमेंट में जरूर बताएं, आपके कमेंटों का हमें इंतजार है धन्यवाद!!!!!

जिन्दगी की कीमत(price of life)



दुलीचंद नगर के सबसे अमीर लोगों में से थे। पैसा तो बहुत कमाया लेकिन मान सम्मान नहीं कमा पाए। कहने को तो इतना पैसा था कि पूरा नगर खरीद लेते लेकिन कभी किसी जरूरतमंद की मदद नहीं की।धीरे धीरे दुलीचंद ने 50 करोड़ की संपत्ति इकट्ठी कर ली, दिन रात सोच सोच कर बहुत खुश होता कि मेरे पास 50 करोड़ रुपये हैं। दुलीचंद ने पूरा जीवन केवल पैसे कमाने में निकाल दिया, ना कभी अच्छे कपड़े पहने और ना ही कभी कोई शौक पूरा किया।पैसे कमाने का जूनून इस कदर सवार था अपने खुद के जीवन की कोई सुध बुध ना रही, बस पैसा ही दुलीचंद का जीवन बन चुका था।एक रात को कमरे में दुलीचंद आराम से सोये हुए थे, अचानक वहां यमराज का दूत आया,दूत बोला – तुम्हारी उम्र पूरी हो चुकी है, तुम्हें यमराज ने बुलाया हैदुलीचंद – लेकिन मैंने तो अभी जीवन सही से जिया भी नहीं है, कृपया मुझे मत ले जाइयेदूत – नहीं तुम्हें जाना होगादुलीचंद – मेरे पास बहुत पैसा है मैं तुम्हें 10 करोड़ दूंगा मुझे 1 साल और जीने दोदूत नहीं मानादुलीचंद बेचारा गिड़गिड़ाते हुए बोला – मैं 20 करोड़ दूंगामुझे 1 महीना जीने दोदूत फिर भी नहीं मानादुलीचंद दया की भीख मांग रहा था – मैं पूरे 50 करोड़ दे दूंगा मुझे 1 घंटा और जीने दोदूत फिर भी नहीं मानादुलीचंद – ठीक है मैं एक पत्र लिखना चाहता हूँ, मुझे बस एक पत्र लिख लेने दोदूत मान गयादुलीचंद ने तेजी से कलम उठाई और एक पत्र लिखा –ये पत्र जिस किसी को भी मिले वो मेरा ये सन्देश लोगों को बताये –“मैंने पूरा जीवन मेहनत करके 50 करोड़ रूपए इकट्ठे किये लेकिन इतनी बड़ी रकम से भी मैं अपने जीवन का 1 घंटा भी नहीं खरीद सका। इस जीवन का हर क्षण अमूल्य है, इसकी कोई कीमत नहीं है। जब तक जीवन हैं भूरपूर जियें दूसरों की मददकरें, हमेशा खुश रहें। बीता समय कभी वापस नहीं आता, आप अपनी पूरी संपत्ति देकर भी अपने जीवन का बीता समय नहीं खरीद सकते”दुलीचंद का ये पत्र वाकई दिल छू लेने वाला है, ये सन्देश केवल एक कहानी नहीं है बल्कि ये सन्देश जीवन की सच्चाई है। आप कितने भी पैसे कमा लें लेकिन जीवन का एक पल भी आप नहीं खरीद सकते। ये जीवन तो अमूल्य है, भरपूर जियें…………………………क्या वाकई आपने इस कहानी से कुछ सीखा? इस कहानी का आप पर क्या प्रभाव हुआ ये हमें नीचे कमेंट में लिखकर जरूर बताएंधन्यवाद

Saturday, 2 April 2016

मदद और दया सबसे बड़ा धर्म Story on Helping Others

ें

कहा जाता है दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है। मदद एक ऐसी चीज़ है जिसकी जरुरत हर इंसान को पड़ती है, चाहे आप बूढ़े हों, बच्चे हों या जवान; सभी के जीवन में एक समय ऐसा जरूर आता है जब हमें दूसरों की मदद की जरुरत पड़ती है। आज हर इंसान ये बोलता है कि कोई किसी की मदद नहीं करता, पर आप खुद से पूछिये- क्या आपने कभी किसी की मदद की है? अगर नहीं तो आप दूसरों से मदद की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?किशोर नाम का एक लड़का था जो बहुत गरीब था। दिन भर कड़ी मेहनत के बाद जंगल से लकड़ियाँ काट के लाता और उन्हें जंगलमें बेचा करता। एक दिन किशोर सर पे लकड़ियों का गट्ठर लिए जंगल से गुजर रहा था। अचानक उसने रास्ते में एक बूढ़े इंसान को देखा जो बहुत दुर्बल था उसको देखकर लगा कि जैसे उसने काफी दिनों खाना नहीं खाया है। किशोर का दिल पिघल गया, लेकिन वो क्या करता उसके पास खुद खाने को नहीं था वो उस बूढ़े व्यक्ति का पेट कैसे भरता? यही सोचकर दुःखी मन सेकिशोर आगे बढ़ गया।आगे कुछ दूर चलने के बाद किशोर को एक औरत दिखाई दी जिसका बच्चा प्यास से रो रहा था क्यूंकि जंगल में कहीं पानी नहीं था। बच्चे की हालत देखकर किशोर से रहा नहीं गया लेकिन क्या करता बेचारा उसके खुद के पास जंगल में पानी नहीं था। दुःखी मन से वो फिर आगे चल दिया। कुछ दूर जाकर किशोर को एक व्यक्ति दिखाई दिया जो तम्बू लगाने के लिए लकड़ियों की तलाश में था। किशोर ने उसे लकड़ियाँ बेच दीं औरबदले में उसने किशोर को कुछ खाना और पानी दिया। किशोर के मन में कुछ ख्याल आया और वो खाना, पानी लेकर वापस जंगल की ओर दौड़ा। और जाकर बूढ़े व्यक्ति को खाना खिलाया और उस औरत के बच्चे को भी पानी पीने को दिया। ऐसा करके किशोर बहुत अच्छा महसूस कर रहा था।

इसके कुछ दिन बाद किशोर एक दिन एक पहाड़ी पर चढ़कर लकड़ियाँ काट रहा था अचानक उसका पैर फिसला और वो नीचे आ गिरा। उसके पैर में बुरी तरह चोट लग गयी और वो दर्द से चिल्लाने लगा। तभी वही बूढ़ा व्यक्ति भागा हुआ आया और उसने किशोर को उठाया। जब उस औरत को पता चला तो वो भी आई और उसने अपनी साड़ी का चीर फाड़ कर उसके पैर पे पट्टी कर दी। किशोर अब बहुत अच्छा महसूस कर रहा था।मित्रों दूसरों की मदद करके भी हम असल में खुद की ही मदद कर रहे होते हैं। जब हम दूसरों की मदद करेंगे तभी जरुरत पढ़ने पर कोई दूसरा हमारी भी मदद करेगा। तो आज इस कहानी को पढ़ते हुए एक वादा करिये की रोज किसी की मदद जरूर करेंगे, रोज नहीं तो कम से कम सप्ताह एक बार , नहीं तो महीने में एकबार। जरुरी नहीं कि मदद पैसे से ही की जाये, आप किसी वृद्धव्यक्ति को सड़क पार करा सकते हैं या किसी प्यासे को पानी पिला सकते हैं या किसी हताश इंसान को सलाह दे सकते हैं या किसी को खाना खिला सकते हैं। यकीन मानिये ऐसा करते हुए आपको बहुत ख़ुशी मिलेगी और लोग भी आपकी मदद जरूर करेंगे , धन्यवाद

Ladka ladki funny joke

लड़का (लड़की से) : तुम्हारी शर्ट फटी हुई है… लड़की : तुम नहीं समझोगे… ये आजकल का फैशन है… लड़का : क्या यार ! साला तुम फाड़ो तो फैशन और हम...